मित्रता हो तो श्री कृष्ण और सुदामा जैसी
हम सभी ने किसी ना किसी के माध्यम से श्री कृष्ण और सुदामा जी की गाथाएं सुनी होगी और उनका गुणगान भी किया है मित्रता के लिए उन्होंने एक नई मिसाल पेश की है आज हम उनकी ही एक गाथा का वर्णन कर रहे हैं अच्छा लगे तो आगे भी भेजिएगा
एक बार की बात हैसुदामा और कृष्ण बैठे हुए थे तो मित्रों में अक्सर बैठकर अपने भविष्य के बारे में एक दूसरे से विचार विमर्श भी करते हैं और भविष्य की योजनाएं भी बनाते हैं उसी प्रकार सुदामा और कृष्ण बैठे थे आपस में बातें कर रहे थे कृष्ण तो अंतर्यामी थे परम ब्रह्मा जी थे सुदामा बोले हे मेरे प्रिय सखा जब हमारी कक्षाएं पूरी हो जाएगी और हमारा बिछड़ने का टाइम आएगा तो हम लोग बिछड़ जाएंगे हे कृष्ण फिर मुझे कभी आप याद करेंगे कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा नहीं मैं याद नहीं करूंगा सुदामा को बुरा लगा और मन ही मन में सोचने लगे कृष्ण मुझे क्यों याद करेगा वह तो अच्छे परिवार से है उसके तो हजारों गाय और गोलमाल साथ में हैं मुझ गरीब को क्यों याद करेगा श्री कृष्ण उनकी अंतरात्मा की बात को सुन रहे थे और धीमे धीमे मुस्कुरा भी रहे थे श्रीकृष्ण ने कहा सुदामा शायद हम कभी फिर ना मिले तो तुम क्या मुझे याद करोगे सुदामा ने सिर हिलाते हुए कहा हां करूंगा सुदामा ने कृष्ण से पूछा क्या तुम मुझे याद करोगी कृष्ण ने हंसते हुए जवाब दिया नहीं मैं याद नहीं करूंगा सुदामा को बहुत बुरा लगा और वहां से उठ कर चला गया जाते समय नहीं कृष्ण की ओर नहीं देखा कृष्ण जी समझ गए कि सुदामा मुझसे नाराज हो गया और बिछड़ने का समय आया कृष्ण सुदामा अलग अलग हो गए कई सालों तक एक दूसरे से मुलाकात नहीं हुई सुदामा की पत्नी ने और सुदामा के बच्चों ने बीते समय की बात उठाई और सुदामा से पूछा क्यों जी आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं कभी उनसे मुलाकात हुई आपकी सुदामा ने कहा नहीं मेरी मुलाकात नहीं हुई है सुदामा की पत्नी ने सुदामा से कहा जाओ एक बार मुलाकात करके तो आओ सुदामा ने मना कर दिया नहीं मैं नहीं जाऊंगा वह मुझे याद नहीं करता अगर करता हूं तो सिर्फ मैं याद करता हूं वह मुझे कभी याद नहीं करता पत्नी के हजार प्रयास करने के बाद सुदामा तैयार हो गया कृष्ण से मिलने के लिए सुदामा की पत्नी ने कृष्ण को बहन के रूप में एक चावल की पोटली थी और कहा इसे अपनी शाखा को दे देना सुदामा नकहा ठीक है मैं दे दूंगा और द्वारका की ओर चलने लगा रास्ते में कई बार पानी और धूप का सामना करना पड़ा जैसे ही द्वारका में सुदामा का प्रवेश हुआ और सुदामा ने द्वारका की रंगीन नगरी को देखा सुदामा की आंखों में आंसू आ गए और कहने लगे मैं उसी दिन रात याद करता हूं लेकिन वह मुझे 1 दिन भी याद नहीं करता चलते चलतेतक पहुंच गए और द्वारपालों से कहा अरे द्वारपालो श्री कृष्ण से कह दो कि आज एक सुदामा मिलने आया है आपसे द्वारपाल श्रीकृष्ण के पास गया और कहने लगा भगवान कोई गरीब ब्राह्मण जिसके तन पर केवल एक धोती है हाथ में एक कमंडल है और मुरझाया हुआ चेहरा द्वार पर खड़ा है और अपना नाम सुदामा बता रहा है आपसे मिलने के लिए कह रहा है जैसे ही श्रीकृष्ण ने सुदामा का नाम सुना कांपने लगे मुंह से आवाज निकलने लगी सुदामा सुदामामेरे सखा सुदामा नंगे पैर भागने लगे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे सुदामा मेरे सखा में आ रहा हूं सुदामा जब श्री कृष्ण की रानी उन्हें देखा यह कौन व्यक्ति है जो श्रीकृष्ण को इतना प्रिय भागते हुए जा रहे हैं और मुंह से सुदामा सुदामा निकल रहा है ना पैरों में कोई खड़ाऊ है नंगे पैर भागते हुए मुख्य द्वार की ओर चिल्लाते हुए सुदामा सुदामा में आ रहा सुदामा ने यह देखा तो वह आश्चर्यचकित रह गया उसने सोचा ही नहीं था कि मेरा सखा मुझे इतना प्रेम करता है मुझे इतना इश्क नहीं करता है जो मेरे लिए नंगे पैर भागता हुआ मुख्य द्वार की ओर आ रहा है और मुंह से एक ही आवाज निकल रही है सुदामा सुदामा जब दोनों लोगों ने एक दूसरे को देखा श्री कृष्ण और सुदामा के आंखों में आंसू आ गए दोनों लोग गले लग गए और रोने लगे श्रीकृष्ण ने कहा अरे पगले मैं तुझे दिन रात याद करता हूं और करता ही रहूंगा तू मेरा सखा मेरे हृदय में वास करता है सुमन सुदामा की आंखों से आंसुओं की गंगा बहने लगी और कहने लगे हे द्वारकाधीश मैं आपको गलत समझता था मैं समझता था कि सिर्फ मैं ही आपको प्रेम और स्नेह करता हूं और याद करता हूं ऐसी होती है मित्रता मित्रों मित्रता ऐसी होनी चाहिए जय श्री कृष्णा जय सुदामा धन्यवाद मित्रों आपको मेरी यह कहानी अच्छी लगी हो तो उसे लाइक और फॉरवर्ड जरूर करें धन्यवाद
हम सभी ने किसी ना किसी के माध्यम से श्री कृष्ण और सुदामा जी की गाथाएं सुनी होगी और उनका गुणगान भी किया है मित्रता के लिए उन्होंने एक नई मिसाल पेश की है आज हम उनकी ही एक गाथा का वर्णन कर रहे हैं अच्छा लगे तो आगे भी भेजिएगा
एक बार की बात हैसुदामा और कृष्ण बैठे हुए थे तो मित्रों में अक्सर बैठकर अपने भविष्य के बारे में एक दूसरे से विचार विमर्श भी करते हैं और भविष्य की योजनाएं भी बनाते हैं उसी प्रकार सुदामा और कृष्ण बैठे थे आपस में बातें कर रहे थे कृष्ण तो अंतर्यामी थे परम ब्रह्मा जी थे सुदामा बोले हे मेरे प्रिय सखा जब हमारी कक्षाएं पूरी हो जाएगी और हमारा बिछड़ने का टाइम आएगा तो हम लोग बिछड़ जाएंगे हे कृष्ण फिर मुझे कभी आप याद करेंगे कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा नहीं मैं याद नहीं करूंगा सुदामा को बुरा लगा और मन ही मन में सोचने लगे कृष्ण मुझे क्यों याद करेगा वह तो अच्छे परिवार से है उसके तो हजारों गाय और गोलमाल साथ में हैं मुझ गरीब को क्यों याद करेगा श्री कृष्ण उनकी अंतरात्मा की बात को सुन रहे थे और धीमे धीमे मुस्कुरा भी रहे थे श्रीकृष्ण ने कहा सुदामा शायद हम कभी फिर ना मिले तो तुम क्या मुझे याद करोगे सुदामा ने सिर हिलाते हुए कहा हां करूंगा सुदामा ने कृष्ण से पूछा क्या तुम मुझे याद करोगी कृष्ण ने हंसते हुए जवाब दिया नहीं मैं याद नहीं करूंगा सुदामा को बहुत बुरा लगा और वहां से उठ कर चला गया जाते समय नहीं कृष्ण की ओर नहीं देखा कृष्ण जी समझ गए कि सुदामा मुझसे नाराज हो गया और बिछड़ने का समय आया कृष्ण सुदामा अलग अलग हो गए कई सालों तक एक दूसरे से मुलाकात नहीं हुई सुदामा की पत्नी ने और सुदामा के बच्चों ने बीते समय की बात उठाई और सुदामा से पूछा क्यों जी आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं कभी उनसे मुलाकात हुई आपकी सुदामा ने कहा नहीं मेरी मुलाकात नहीं हुई है सुदामा की पत्नी ने सुदामा से कहा जाओ एक बार मुलाकात करके तो आओ सुदामा ने मना कर दिया नहीं मैं नहीं जाऊंगा वह मुझे याद नहीं करता अगर करता हूं तो सिर्फ मैं याद करता हूं वह मुझे कभी याद नहीं करता पत्नी के हजार प्रयास करने के बाद सुदामा तैयार हो गया कृष्ण से मिलने के लिए सुदामा की पत्नी ने कृष्ण को बहन के रूप में एक चावल की पोटली थी और कहा इसे अपनी शाखा को दे देना सुदामा नकहा ठीक है मैं दे दूंगा और द्वारका की ओर चलने लगा रास्ते में कई बार पानी और धूप का सामना करना पड़ा जैसे ही द्वारका में सुदामा का प्रवेश हुआ और सुदामा ने द्वारका की रंगीन नगरी को देखा सुदामा की आंखों में आंसू आ गए और कहने लगे मैं उसी दिन रात याद करता हूं लेकिन वह मुझे 1 दिन भी याद नहीं करता चलते चलतेतक पहुंच गए और द्वारपालों से कहा अरे द्वारपालो श्री कृष्ण से कह दो कि आज एक सुदामा मिलने आया है आपसे द्वारपाल श्रीकृष्ण के पास गया और कहने लगा भगवान कोई गरीब ब्राह्मण जिसके तन पर केवल एक धोती है हाथ में एक कमंडल है और मुरझाया हुआ चेहरा द्वार पर खड़ा है और अपना नाम सुदामा बता रहा है आपसे मिलने के लिए कह रहा है जैसे ही श्रीकृष्ण ने सुदामा का नाम सुना कांपने लगे मुंह से आवाज निकलने लगी सुदामा सुदामामेरे सखा सुदामा नंगे पैर भागने लगे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे सुदामा मेरे सखा में आ रहा हूं सुदामा जब श्री कृष्ण की रानी उन्हें देखा यह कौन व्यक्ति है जो श्रीकृष्ण को इतना प्रिय भागते हुए जा रहे हैं और मुंह से सुदामा सुदामा निकल रहा है ना पैरों में कोई खड़ाऊ है नंगे पैर भागते हुए मुख्य द्वार की ओर चिल्लाते हुए सुदामा सुदामा में आ रहा सुदामा ने यह देखा तो वह आश्चर्यचकित रह गया उसने सोचा ही नहीं था कि मेरा सखा मुझे इतना प्रेम करता है मुझे इतना इश्क नहीं करता है जो मेरे लिए नंगे पैर भागता हुआ मुख्य द्वार की ओर आ रहा है और मुंह से एक ही आवाज निकल रही है सुदामा सुदामा जब दोनों लोगों ने एक दूसरे को देखा श्री कृष्ण और सुदामा के आंखों में आंसू आ गए दोनों लोग गले लग गए और रोने लगे श्रीकृष्ण ने कहा अरे पगले मैं तुझे दिन रात याद करता हूं और करता ही रहूंगा तू मेरा सखा मेरे हृदय में वास करता है सुमन सुदामा की आंखों से आंसुओं की गंगा बहने लगी और कहने लगे हे द्वारकाधीश मैं आपको गलत समझता था मैं समझता था कि सिर्फ मैं ही आपको प्रेम और स्नेह करता हूं और याद करता हूं ऐसी होती है मित्रता मित्रों मित्रता ऐसी होनी चाहिए जय श्री कृष्णा जय सुदामा धन्यवाद मित्रों आपको मेरी यह कहानी अच्छी लगी हो तो उसे लाइक और फॉरवर्ड जरूर करें धन्यवाद

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