मंगलवार, 11 सितंबर 2018

आरक्षण को हटाना है

https://youtu.be/qbDu0-0Q3Lg
अब एक नए युग की शुरुआत करनी है जिसमें आरक्षण को उधर करार करना है जिससे युवाओं की प्रतिभा सोहर गीत समाज हित में काम आ सके

शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

rama ji kigatha

रामायण के अनुसार राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया था। इस यज्ञ को मुख्य रूप से ऋषि ऋष्यश्रृंग ने संपन्न किया था। ऋष्यश्रृंग के पिता का नाम महर्षि विभाण्डक था। एक दिन जब वे नदी में स्नान कर रहे थे तब नदी में उनका वीर्यपात हो गया। उस जल को एक हिरणी ने पी लिया था, जिसके फलस्वरूप ऋषि ऋष्यश्रृंग का जन्म हुआ था।

2. हिंदू धर्म में तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं की मान्यता है, जबकि रामायण के अरण्यकांड के चौदहवे सर्ग के चौदहवे श्लोक में सिर्फ तैंतीस देवता ही बताए गए हैं। ग्रंथ के अनुसार बारह आदित्य, आठ वसु, ग्यारह रुद्र और दो अश्विनी कुमार, ये ही कुल तैंतीस देवता हैं।

3. महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित 'रामायण' में सीता स्वयंवर का वर्णन नहीं है। रामायण के अनुसार भगवान राम व लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिला पहुंचे, तब विश्वामित्र ने ही राजा जनक से श्रीराम को वह शिवधनुष दिखाने के लिए कहा। तब भगवान श्रीराम ने उस धनुष को उठा लिया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। राजा जनक ने यह प्रण किया था कि जो भी इस शिव धनुष को उठा लेगा, उसी से वे अपनी पुत्री सीता का विवाह कर देंगे।

4. विश्वविजय के दरम्यान जब रावण स्वर्ग लोक पहुंचा तो उसे रंभा नाम की अप्सरा दिखाई दी। रावण ने उसे पकड़ लिया। तब रंभा ने कहा कि आप मुझे इस तरह से स्पर्श न करें, मैं आपके बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर के लिए हूं। इसलिए मैं आपकी पुत्रवधू हूं, लेकिन रावण नहीं माना और उसने रंभा से दुराचार किया। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को श्राप दिया कि आज के बाद रावण बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसे स्पर्श करेगा तो उसके सिर के सौ टुकड़े हो जाएंगे।

5. जिस समय भगवान श्रीराम वनवास गए, उस समय उनकी आयु लगभग 27 वर्ष थी। राजा दशरथ श्रीराम को वनवास नहीं भेजना चाहते थे, लेकिन वे वचनबद्ध थे। जब श्रीराम को रोकने का कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने श्रीराम से यह तक कह दिया था कि हे राम तुम मुझे बंदी बनाकर स्वयं राजा बन जाओ।

6. प्रभु राम के भाई लक्ष्मण ने रावण की बहन शूर्पणखा के नाक-कान काटे जाने से क्रोधित होकर ही रावण ने सीता का हरण किया था, लेकिन स्वयं शूर्पणखा ने भी रावण का सर्वनाश होने का शाप दिया था। दरअसल शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था। वो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था। रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से उसका युद्ध हुआ। उस युद्ध में रावण ने विद्युतजिव्ह का वध कर दिया। तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को शाप दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।

7. जिस दिन रावण सीता का हरण कर अपनी अशोक वाटिका में लाया। उसी रात को भगवान ब्रह्मा के कहने पर देवराज इंद्र माता सीता के लिए खीर लेकर आए, पहले देवराज ने अशोक वाटिका में उपस्थित सभी राक्षसों को मोहित कर सुला दिया। उसके बाद माता सीता को खीर अर्पित की, जिसके खाने से सीता की भूख-प्यास शांत हो गई।

8. सीताहरण करते समय जटायु नामक गिद्ध ने रावण को रोकने का प्रयास किया था। रामायण के अनुसार जटायु के पिता अरुण हैं। ये अरुण ही भगवान सूर्यदेव के रथ के सारथी हैं।

9. जब भगवान राम और लक्ष्मण वन में सीता की खोज कर रहे थे। उस समय कबंध नामक राक्षस का प्रभु राम-लक्ष्मण ने वध कर दिया। वास्तव में कबंध एक शाप के कारण राक्षस बन गया था। जब श्रीराम ने उसके शरीर को अग्नि में समर्पित किया तो वह शाप से मुक्त हो गया। कबंध ने ही श्रीराम को  

गुरुवार, 6 सितंबर 2018

रामचरितमानस हिंदी में सारांश

                    रामचरितमानस का पाठ हिंदी में सारांश
सो0_जो सुमिरत सिधि होइ गणनायक करवर सदन. करो अनुग्रह सोईबुद्धि रासि सुभ गुन सदन
हिन्दी. जिन्हें स्मरण करने से सर्व कार्य सिद्ध होते हैं जो गणों के स्वामी और सुंदर हाथों के मुख वाले हैं वही बुद्धि के राशि और शुभ गुणों का धाम श्री गणेश जी मुझ पर कृपा करें  मूक होई वाचाल पंगु चढ़ै गिरिवरगहन जिनकी कृपा से गूंगा बहुत सुंदर बोलने वाला हो जाता है और लंगड़ा लूला दुर्गम पहाड़ पर चढ़ जाता है देख कलयुग के सब पापों को जला डालने वाले दयालु भगवान मुझ पर दया करें जो नीलकमल के समान श्याम वर्ण है पूर्ण खिले हुए लाल कमल के समान जिनके नेत्र हैं और जो सदा छीरसागर सेन करते हैं देव भगवान नारायण मेरे हृदय में निवास करते हैं जिनका कुंड के पुष्प और चंद्रमा के समान गौर शरीर है जो पार्वती जी के प्रियतम और दया के धाम है और जिनका दिनों पर स्नेह है कामदेव का मर्दन करने वाले शंकर जी मुझ पर कृपा करें मैं उन गुरु महाराज के चरण कमल की वंदना करता हूं जो कृपा के समुद्र और नर रूप में श्रीहरि ही है और जिनके बच्चन महा मोहे रूपी घने अंधकार के नाश करने वाले सूर्य की किरणों के समान हैं ऐसे हरि को मैं बारंबार प्रणाम करता हूं मैं गुरु महाराज के चरण कमलों की रज की वंदना करता हूं जो सुरुचि सुंदर स्वभाव सुगंध तथा अनुराग रूपी रस में पूर्ण है और अमर मूल संजीवनी जड़ी का सुंदर चूर्ण है संपूर्ण भैरव को नाश करने वाले श्रीहरि को मैं बारंबार प्रणाम करता हूं   

राजू महाराज ओरछा आपको हिंदी में रामचरितमानस का सारांश अवगत कराऊंगा जय श्री राम ओरछा धाम

मित्रता सुदामा जैसी

                      मित्रता हो तो श्री कृष्ण और सुदामा जैसी

हम सभी ने किसी ना किसी के माध्यम से श्री कृष्ण और सुदामा जी की गाथाएं सुनी होगी और उनका गुणगान भी किया है मित्रता के लिए उन्होंने एक नई मिसाल पेश की है आज हम उनकी ही एक गाथा का वर्णन कर रहे हैं अच्छा लगे तो आगे भी भेजिएगा
एक बार की बात हैसुदामा और कृष्ण बैठे हुए थे तो मित्रों में अक्सर बैठकर अपने भविष्य के बारे में एक दूसरे से विचार विमर्श भी करते हैं और भविष्य की योजनाएं भी बनाते हैं उसी प्रकार सुदामा और कृष्ण बैठे थे आपस में बातें कर रहे थे कृष्ण तो अंतर्यामी थे परम ब्रह्मा जी थे सुदामा बोले हे मेरे प्रिय सखा जब हमारी कक्षाएं पूरी हो जाएगी और हमारा बिछड़ने का टाइम आएगा तो हम लोग बिछड़ जाएंगे हे कृष्ण फिर मुझे कभी आप याद करेंगे कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा नहीं मैं याद नहीं करूंगा सुदामा को बुरा लगा और मन ही मन में सोचने लगे कृष्ण मुझे क्यों याद करेगा वह तो अच्छे परिवार से है उसके तो हजारों गाय और गोलमाल साथ में हैं मुझ गरीब को क्यों याद करेगा श्री कृष्ण उनकी अंतरात्मा की बात को सुन रहे थे और धीमे धीमे मुस्कुरा भी रहे थे श्रीकृष्ण ने कहा सुदामा शायद हम कभी फिर ना मिले तो तुम क्या मुझे याद करोगे सुदामा ने सिर हिलाते हुए कहा हां करूंगा सुदामा ने कृष्ण से पूछा क्या तुम मुझे याद करोगी कृष्ण ने हंसते हुए जवाब दिया नहीं मैं याद नहीं करूंगा सुदामा को बहुत बुरा लगा और वहां से उठ कर चला गया जाते समय नहीं कृष्ण की ओर नहीं देखा कृष्ण जी समझ गए कि सुदामा मुझसे नाराज हो गया और बिछड़ने का समय आया कृष्ण सुदामा अलग अलग हो गए कई सालों तक एक दूसरे से मुलाकात नहीं हुई सुदामा की पत्नी ने और सुदामा के बच्चों ने बीते समय की बात उठाई और सुदामा से पूछा क्यों जी  आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं कभी उनसे मुलाकात हुई आपकी सुदामा ने कहा नहीं मेरी मुलाकात नहीं हुई है सुदामा की पत्नी ने सुदामा से कहा जाओ एक बार मुलाकात करके तो आओ सुदामा ने मना कर दिया नहीं मैं नहीं जाऊंगा वह मुझे याद नहीं करता अगर करता हूं तो सिर्फ मैं याद करता हूं वह मुझे कभी याद नहीं करता पत्नी के हजार प्रयास करने के बाद सुदामा तैयार हो गया कृष्ण से मिलने के लिए सुदामा की पत्नी ने कृष्ण को बहन के रूप में एक चावल की पोटली थी और कहा इसे अपनी शाखा को दे देना सुदामा नकहा ठीक है मैं दे दूंगा और द्वारका की ओर चलने लगा रास्ते में कई बार पानी और धूप का सामना करना पड़ा जैसे ही द्वारका में सुदामा का प्रवेश हुआ और सुदामा ने द्वारका की रंगीन नगरी को देखा सुदामा की आंखों में आंसू आ गए और कहने लगे मैं उसी दिन रात याद करता हूं लेकिन वह मुझे 1 दिन भी याद नहीं करता चलते चलतेतक पहुंच गए और द्वारपालों से कहा अरे द्वारपालो श्री कृष्ण से कह दो कि आज एक सुदामा मिलने आया है आपसे द्वारपाल श्रीकृष्ण के पास गया और कहने लगा भगवान कोई गरीब ब्राह्मण जिसके तन पर केवल एक धोती है हाथ में एक कमंडल है और मुरझाया हुआ चेहरा द्वार पर खड़ा है और अपना नाम सुदामा बता रहा है आपसे मिलने के लिए कह रहा है जैसे ही श्रीकृष्ण ने सुदामा का नाम सुना कांपने लगे मुंह से आवाज निकलने लगी सुदामा सुदामामेरे सखा सुदामा नंगे पैर भागने लगे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे सुदामा मेरे सखा में आ रहा हूं सुदामा जब श्री कृष्ण की रानी उन्हें देखा यह कौन व्यक्ति है जो श्रीकृष्ण को इतना प्रिय भागते हुए जा रहे हैं और मुंह से सुदामा सुदामा निकल रहा है ना पैरों में कोई खड़ाऊ है नंगे पैर भागते हुए मुख्य द्वार की ओर चिल्लाते हुए सुदामा सुदामा में आ रहा सुदामा ने यह देखा तो वह आश्चर्यचकित रह गया उसने सोचा ही नहीं था कि मेरा सखा मुझे इतना प्रेम करता है मुझे इतना इश्क नहीं करता है जो मेरे लिए नंगे पैर भागता हुआ मुख्य द्वार की ओर आ रहा है और मुंह से एक ही आवाज निकल रही है सुदामा सुदामा जब दोनों लोगों ने एक दूसरे को देखा श्री कृष्ण  और सुदामा के आंखों में आंसू आ गए दोनों लोग गले लग गए और रोने लगे श्रीकृष्ण ने कहा अरे पगले मैं तुझे दिन रात याद करता हूं और करता ही रहूंगा तू मेरा सखा मेरे हृदय में वास करता है सुमन सुदामा की आंखों से आंसुओं की गंगा बहने लगी और कहने लगे हे द्वारकाधीश मैं आपको गलत समझता था मैं समझता था कि सिर्फ मैं ही आपको प्रेम और स्नेह करता हूं और याद करता हूं ऐसी होती है मित्रता मित्रों मित्रता ऐसी होनी चाहिए जय श्री कृष्णा जय सुदामा धन्यवाद मित्रों आपको मेरी यह कहानी अच्छी लगी हो तो उसे लाइक और फॉरवर्ड जरूर करें धन्यवाद

मंगलवार, 31 जुलाई 2018

सोमवार, 30 अप्रैल 2018

मेष राशि 1मई का दिन कैसा रहेगा

मेष राशि का आज का राशिफल (1 मई, 2018)<br/><br/>बेकार की बात पर बहस करके अपकी ऊर्जा ज़ाया न करें। याद रखें कि वाद-विवाद से कुछ भी हासिल नहीं होता, लेकिन खोता ज़रूर है। अचानक आए अप्रत्याशित ख़र्चे आपके ऊपर आर्थिक तौर पर बोझ डाल सकते हैं। कोई ऐसा जिसके साथ आप रहते हैं, आपके लापरवाह और अनिश्चित बर्ताव की वजह से चिढ़ सकता है। ज़रा संभल कर, क्योंकि आपका प्रिय रूमानी तौर पर आपको मक्खन लगा सकता है - मैं तुम्हारे बग़ैर इस दुनिया में नहीं रह सकता/सकती। व्यवसाय में किसी धोखेबाज़ी से बकने के लिए अपने आँख-कान खुले रखें। आज सोच-समझकर क़दम बढ़ाने की ज़रूरत है- जहाँ दिल की बजाय दिमाग़ का ज़्यादा इस्तेमाल करना चाहिए। आपका जीवनसाथी वाक़ई आपके लिए फ़रिश्तों की तरह है और आपको आज यह एहसास होगा।

भाग्यांक: 7 

joteesh

joteesh ki jan kari

aap apne gheeraho ke bare me jan sakte hai or ham se raye bhi le sakte hai
jivan me ho rahe dus pirbhav ke karan aap ka karo bar nahi chal raha hai ya ghar me koi pareshani hai

तो आप जान साकते है 

फ्री में 

शनिवार, 4 नवंबर 2017

hamare bina kese gujaro ge jindgi



 jamaqna tere pyar me mar gaya or ham ko bhi yad nahi aaeee
      

गुरुवार, 2 नवंबर 2017

                                 jai shree ram

jivan me bahut bhag dod me ne bahut kuchh sikha diya hai ham jitne bhi piryas kiya utna hi ham pichhe chala jata hu...
  me ri suru bat tab hota hia me panch sal ka tha me ri ma ne mujhe das rupya diya or kaha ki ja pesaa kama ke la me bahut chhota tha lekin kam kar na meri majburi thior me kya


 karta tha


                                                             jai shree ram

 

© 2013 s.k.pathak. All rights resevered. Designed by Templateism | Blogger Templates

Back To Top